आखिर क्या है कंप्यूटर?

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विज्ञान ने मानव जीवन को सरल बना दिया है यह कहने में कोई दो राय नहीं। ठीक वैसे ही कंप्यूटर भी विज्ञान का आज की तकनीकी दुनिया को दिया हुआ एक सफल आविष्कार और तोहफा है। हम चारों तरफ से मशीनो से घिरे हुए हैं। टीवी, मोबाइल, फ्रीज, लैपटॉप, ए.सी सब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं और हमारी आदत भी। लेकिन आज हम केवल कंप्यूटर को समझने का प्रयास करेंगे तो आईये जानते हैं क्या है? कंप्यूटर और क्या है इसका इतिहास?

विज्ञान की भाषा में कंप्यूटर का अर्थ यह है कि कंप्यूटर एक मशीन है जिसे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग माध्यम से स्वचालित रूप से अंकगणित तार्किक संचालन के अनुक्रम को पूरा करने के लिए निर्देश दिए जाते हैं। आधुनिक और वर्तमान कंप्यूटर में संचालन के अनुकूल सेटों का पालन करने की क्षमता होती है यह प्रोग्राम कंप्यूटरों को अत्यधिक विस्तृत कार्य करने में सक्षम बनाता है।

 क्या है कंप्यूटर

 कंप्यूटर एक ऐसी यांत्रिक मशीन है जो उपयोगकर्ता द्वारा इनपुट किए गए डाटा में प्रक्रिया करके सूचनाओं को रिजल्ट के रूप में प्रदान करता है। साधारण शब्दों में यदि हम समझे कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक मशीन है  जो उपयोगकर्ता द्वारा दी गई कमांड्स को फॉलो करता है इसमें डाटा को स्टोर प्राप्त करने की क्षमता होती होती है।

कंप्यूटर ने जीवन को दी नई गति

कंप्यूटर एक नई तकनीक है जो आजकल हर जगह पर इस्तेमाल की जाती है। कंप्यूटर कम समय लेकर ज्यादा से ज्यादा कार्य को आसान बनाता है। इसका सकारात्मक पहलू यह भी है कि कंप्यूटर कार्यस्थल पर व्यक्ति श्रम को कम कर देता है अर्थात कम समय और कम श्रम शक्ति में उच्च स्तर के परिणाम प्रदान करता है। आधुनिक समय में कंप्यूटर के बिना जीवन की कल्पना करना भी असंभव है हम लोग कंप्यूटर में इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं जो बहुत कम समय में में जरूरी जानकारी उपलब्ध कराता है एक नौकरी पेशा व्यक्ति के जीवन में इसका बड़ा योगदान है क्योंकि कंप्यूटर का प्रयोग हर क्षेत्र में किया जाता है।

एक नजर इतिहास की ओर.

अबेकस एक तारों का फ्रेम होता है। इन तारों (Wires) में बीड ( पक्की मिट्टी के गोले जिनमें छेद होते हैं) पिरोई रहती है। इस फ्रेम के दो भाग होते हैं- छोटे भाग को Heaven तथा  दूसरे बड़े भाग को Earth कहा जाता है। फ्रेम के एक तरह के प्रत्येक तार में दो बीड होती हैं जिनमें प्रत्येक का मान 5 होता है तथा दूसरे भाग के प्रत्येक तार में 5 बीड होती हैं जिनमें प्रत्येक का मान 1 होता है। प्रारम्भ में अबेकस को व्यापारी लोग गणनाएं करने के काम में प्रयोग किया करते थे। यह मशीन अंकों की जोड़, गुणा, तथा भाग क्रियाएं करने के काम आती 

17वी शताब्दी के दौरान ब्लेज पास्कल फ्रांस में  गणितज्ञ व भौतिक-शास्त्री हुआ करते थे। उन्होंने mechanical Digital Calculator का विकास सन् 1642 ई. में किया। इस मशीन को ऐडिंग मशीन कहते थे।  क्योंकि यह मशीन केवल जोड़ या घटा कर सकती थी। यह मशीन घड़ी और ओडोमीटर के सिद्धांतों पर कार्य करती थी। इस मशीन में 10 दांतो वाली रेचेट गियर  का प्रयोग किया गया। पहले इकाई वाले रेचेट गियर का दस अंकों का एक चक्र पूरा हो जाने पर दहाई वाले रेचेट गियर का एक दांत आगे बढ़ता था। इस प्रकार दहाई वाले रेचेट गियर का दस दांतो का एक चक्र पूरा होने पर सैकेण्ड वाले रेचेट गियर का एक दांत आगे बढ़ता था। ये रेचेट गियर हाथ से घुमाये जाने वाले पहियों की सहायता से चलाये जाते थे। ब्लेज पास्कल की एडिंग मशीन (Adding Machine) को पास्कलाइन(Pascaline) कहते हैं, जो सबसे पहली Mechanical Calculating Machine थी। 
इस डिवाइस की क्षमता लगभग 6  व्यक्तियों के बराबर थी आज भी कार व स्कूटर के speedometer में यही सिस्टम काम करता है। चार्ल्स बैबेज ने डिफरेंस इंजिन की सफलता से प्रेरित होकर चार्ल्स बैबेज ने एक ऐसे कैल्कुलेटिंग डिवाइस (Calulating Device) की परिकल्पना की, जिसमें उसकी एक कृत्रिम स्मृति (Artificial Memory) हो एवं दिये गये प्रोग्राम के अनुसार कैल्कुलेशन करे। इस डिवाइस को उन्होंने  बैबेज एनालिटिकल इंजिन नाम दिया। 

यह मशीन कई प्रकार के गणना संबंधी कार्य ((Computing Work) करने में सक्षम थी। यह पंचकार्डों पर संग्रहीत (Stored) निर्देशों के समूह द्वारा निर्देशित होकर कार्य करती थी। इसमें निर्देशों (instructions) को संग्रहीत करने की क्षमता थी। और इसके द्वारा स्वाचलित रूप से परिणाम भी छापे जा सकते थे।

बैबेज का यह एनालिटिकल इंजिन आधुनिक कम्प्यूटर का आधार बना यही कारण है की चार्ल्स बैबेज को कंप्यूटर का जनक कहा जाता है। लिटिकल इंजिन शुरू में बेकार समझा गया था तथा उसकी उपेक्षा की गई जिसके कारण बैबेज को बड़ी निराशा हुई। परंतु एडा ऑगस्टा(Ada Augusta), जो प्रसिद्ध कवि लॉर्ड वायरन की पुत्री थी। उन्होंने बैबेज के उस एनालिटिकल इंजिन में गणना के निर्देशों को विकसित करने में मदद की। चार्ल्स को जिस प्रकार कंप्यूटर विज्ञान का जनक होने का गौरव प्राप्त है उसी प्रकार विश्व में एडा ऑगस्टा को “पहले प्रोग्रामर” होने का श्रेय जाता है। एडा ऑगस्टा को सम्मानित करने के उद्देश्य से एक प्रोग्रामिंग भाषा का नाम “एडा” (ada) रखा गया।

समय-समय पर अलग-अलग वैज्ञानिकों ने अलग-अलग तकनीकों का आविष्कार किया परंतु बैक संपन्न कंप्यूटर का रूप नहीं ले पाए हर किसी का आविष्कार में कोई ना कोई कमी जरूर होती थी।आईकेन और IBM के मार्क-1 की तकनीक, नई इलैक्ट्रॉनिक्स तकनीक के आने से पुरानी हो गयी थी। नयी इलैक्ट्रॉनिक तकनीक मशीनों में विद्युत की उपस्थिति व अनुपस्थिति का सिद्धांत था। इसमें कोई भी चलायमान (movalbe) पुर्जा नहीं था इसलिए यह विद्युत यांत्रिक (Electro Mechanical) मशीन से तेज गति से चलता था

सन् 1945 में एटानासोफ ने एक इलैक्ट्रॉनिक मशीन को विकसित किया, जिसका नाम ए.बी.सी (A.B.C) रखा गया। ABC, Atanasoff Berry Computer का संक्षिप्त रूप है। ABC सबसे पहला इलैक्ट्रॉनिक कंप्यूटर था।

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मेरा नाम अंजलि हे। मैं दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही हूँ। मुझे नए विषयों पर शोध करना और उन पर लेख लिखना पसंद है। इसलिए, मैं Go Articles वेबसाइट में बतौर लेखिका के रूप में लिख रही हूं ताकि आप भी इन नई तकनीकों और जानकारियों से अवगत हो सकें। आशा है आप हमारे लिखे लेखों को पसंद करेंगे ।

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